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About GST
 
3 अगस्‍त, 2016 को भारतीय कराधान के इतिहास में एक सुनहरे अक्षरों वाले दिन के तौर पर दर्ज किया जाएगा क्‍योंकि इसी दिन राज्‍यसभा में 122वें संवैधानिक बिल को लगभग आम सहमति से पारित किया गया। इससे भारत में जी एस टी को 1 अप्रैल 2017 से लागू करने का मार्ग प्रशस्‍त हुआ। गुड्स  एंड सर्विसेस टैक्स बिल का पिछले दशक के दौरान महत्‍वपूर्ण रूप से विकास हुआ है स्‍वतंत्रता के बाद से यह भारत की सबसे बड़ा कर सुधार योजना है।अनुमान है कि इससे जीडीपी में 1.5 से लेकर 2% तक की वृद्धि होगी। जी एस टी के साथ ‘वन इंडिया, वन टैक्‍स’ एक नई वास्‍तविकता बन जाएगी जिसमें दस से अधिक अप्रत्‍यक्ष करों को सम्मिलित किया गया है और इससे भारत एक समान बाज़ार बन जाएगा। इसके कैस्‍केडिंग इफेक्‍ट को समाप्‍त करने के अलावा, सरलीकृत अनुपालन, तकनीकी समर्थन और पूरे भारत में एकीकृत प्रक्रिया से ‘ईज़ ऑफ़ डुईंग बिजनेस (व्‍यवसाय करने में सरलता)’ की भावना को काफी मदद मिलेगी। हालांकि किसी व्‍यवसाय की सफलता इस नई वास्‍तविकता को समझने और इसके अनुरूप स्‍वयं को ढालने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगी क्‍योंकि कुछ निश्चित वर्तमान व्‍यावसायिक प्रक्रियाओं को परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स एक समग्र टैक्‍स है जिसे पूरे भारत में वस्‍तुओं व सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाएगा। जी एस टी एक गंतव्‍य आधारित उपभोग टैक्‍स है और बिक्री, निर्माण या सेवाओं के प्रावधान के मौजूदा टैक्‍सेबल इवेंट के उलट इसमें टेक्‍सेबल इवेंट सप्‍लाई होती है। मॉडल जी एस टी कानून का ड्राफ़्ट जून 2016 में सार्वजनिक किया गया था और सरकार ने इस पर सार्वजनिक राय मांगी। यह ऐसा खास अवसर है कि व्‍यवसायों, औद्योगिक/व्‍यापारिक निकायों, पेशेवर एसोसिएशनों और समकक्ष पक्षों को जल्‍दी से जल्‍दी अपने मान्‍य विचार सामने रखने और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जी एस टी का अंतिम कानून इस रूपांतरण को सहज बनाने वाली सभी चिंताओं पर ध्‍यान देता हो।

पृष्‍ठभूमि

भारत की अप्रत्‍यक्ष कराधान प्रणाली में पिछले 5 से 6 दशकों के दौरान कई बड़े बदलाव लाये गये हैं। 1986 में MODVAT (मॉडवैट) स्‍कीम, एक्‍साइज व सर्विस टैक्‍स के बीच क्रेडिट की समरूपता (2004), वैट लागू करना (2005 के आगे) को इन वर्षों के दौरान शुरू किये जाने के फलस्‍वरूप कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ी, करदाताओं की परेशानियों में कमी आई और कैस्‍केडिंग इफ़ेक्‍ट (सोपानी प्रभाव) समाप्‍त हुआ जिससे अंतत: उपभोक्‍ताओं को लाभ पहुंचा। हालांकि, भारत में संघीय ढांचा लागू होने का यह परिणाम हुआ कि कर पर केंद्र व राज्‍य दोनों का नियंत्रण है। इन दोनों निकायों के बीच क्रेडिट उपयोग की सुविधा की कमी का नतीजा यह हुआ कि प्रणाली में अभी भी आंशिक कैस्‍केडिंग (सोपानी प्रभाव) मौजूद है। इसके अतिरिक्‍त, कई एजेंसियों की भागीदारी की वजह से अनुपालन का बोझ भी बढ़ गया है। सिंगल टैक्‍स द्वारा पूरे भारत में एकजैसी कर प्रणाली लागू करने को गति देकर और टैक्‍स क्रेडिट का मुक्‍त प्रवाह सुनिश्चित करके जी एस टी द्वारा सटीक ढंग से इन चिंताओं का समाधान किया जाएगा। अवधारणा के तौर पर, जी एस टी वैट के समान है जिसका मतलब है कि आपूति श्रंखला में प्रत्‍येक बिंदु पर केवल मूल्‍य वृद्धि पर ही कर लागू किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएं

जी एस टी की कुछ मुख्‍य विशेषताएं हैं:

पंजीकरण:

जी एस टी पंजीकरण प्रभावसीमा को उत्तरपूर्वी राज्‍यों + सिक्किम के लिए 9 लाख रुपये और शेष भारत के लिए 19 लाख रुपये रखना प्रस्‍तावित किया गया है। हालांकि कर चुकाने की देयता उत्तरपूर्वी राज्‍यों + सिक्किम में 10 लाख रुपये की प्रभावसीमा पार करने के बाद और शेष भारत में 20 लाख रुपये की प्रभावसीमा पार करने के बाद ही लागू होगी। संभावना है कि लगभग 70-80 लाख व्‍यवसाय जी एस टी के अंतर्गत पंजीकृत होंगे। 50 लाख रुपये से कम टर्नओवर वाले छोटे डीलरों के पास कम्‍पोजीशन स्‍कीम अपनाने और टर्नओवर पर फ्लैट टैक्‍स चुकाने का विकल्‍प होगा।
जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया इन लिंक पर जाएँ –
पंजीकृत डीलर? जानिए जी एस टी पर कैसे संक्रमण करे
नए जी एस टी पंजीकरण के लिए कैसे आवेदन करें ?
जी एस टी पंजीकरण कैसे संशोधित, निरस्त या निरसित करें ?

दोहरा जी एस टी:

भारत के संघीय ढांचे को ध्‍यान में रखते हुए, दोहरे जी एस टी को ऐसे सही मॉडल के तौर पर चुना गया है जिसमें वस्‍तुओं व सेवाओं की आपूर्ति पर केंद्र और राज्‍यों दोनों के द्वारा संयुक्‍त रूप से कर लागू किया जाएगा।
दोहरे जी एस टी के हिस्से निम्‍नलिखित हैं:
  • सी जी एस टी: केंद्रीय जी एस टी
  • एस जी एस टी: राज्‍य जी एस टी
  • आई जी एस टी: एकीकृत जी एस टी
राज्‍य के भीतर होने वाले लेनदेन पर सीजी एस टी+एसजी एस टी लागू होगा और राज्‍यों के बीच परस्‍पर लेनदेन पर, आईजी एस टी लागू होगा।

जी एस टी की दरें:

दरों के 3 सेट होने की संभावना है जैसा कि नीचे दिया गया है:
  • मेरिट रेट
  • स्‍टैंडर्ड रेट
  • डि-मेरिट रेट बहुमूल्‍य धातुओं के लिए कम दर और अतिआवश्‍यक वस्‍तुओं के लिए शून्‍य-दर होने की भी संभावना है।

सम्मिलित किये गये कर:

  • जी एस टी के अंतर्गत सम्मिलित होने वाले कर ये हैं:
जी एस टी में सम्मिलितजी एस टी में सम्मिलित नहीं
सेंट्रल एक्‍साइजबेसिक कस्‍टम ड्यूटी
सर्विस टैक्‍समानव उपभोग के लिए अल्‍कोहल
वैट / सेल्‍स टैक्‍सपेट्रोल / डीज़ल / एविएशन फ्यूल / नैचुरल गैस*
इंटरटेनमेंट टैक्‍सस्‍टैम्‍प ड्यूटी और प्रॉपट्री टैक्‍स
लक्‍ज़री टैक्‍सटॉल टैक्‍स
लॉटरी पर टैक्‍सइलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी
ऑक्‍ट्राई एंड एंट्री टैक्‍स
परचेज़ टैक्‍स
*केवल बाद में अधिसूचित तिथि पर शामिल किये जाने हेतु

आईटीसी का उपयोग:

कर देयता की क्षतिपूर्ति के लिए इनपुट टैक्‍स क्रेडिट प्राप्‍त करने का तरीका निम्‍न प्रकार निर्धारित किया गया है:
इनपुट टैक्‍स क्रेडिटइनके विरुद्ध देयता की क्षतिपूर्ति
सीजी एस टीसीजी एस टी और आईजी एस टी (इस क्रम में)
एसजी एस टीएसजी एस टी और आईजी एस टी (इस क्रम में)
आईजी एस टीआईजी एस टी, सीजी एस टी, एसजी एस टी (इस क्रम में)
कृपया ध्‍यान दें कि सीजी एस टी और एसजी एस टी की एक-दूसरे के विरुद्ध क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती है।

आईटी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर:

गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स नेटवर्क या जी एस टीएन, सेक्‍शन 25/सेक्‍शन 8 के तहत एक अलाभकारी कंपनी है जिसे जी एस टी की ई-फाइलिंग संबंधी समस्‍त आवश्‍यकताएं पूरी करने के उद्देश्‍य से आईटी समर्थन (बैकएंड और फ्रंटएंड) व पोर्टल को शुरू करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (निजी कंपनियां, केद्र व राज्‍य सरकार इसकी हितधारक हैं) के अंतर्गत निगमित किया गया है। यह नोडल एजेंसी होगी जो सभी प्रक्रियाओं, फ़ॉर्म को नियंत्रित करेगी और साथ ही देश में होने वाले समस्‍त व्‍यापार के डेटा को भी नियंत्रित करेगी।

जी एस टी कौंसिल:

इस बिल को राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिलने के 60 दिनों के भीतर कौंसिल का निर्माण किया जाएगा जो राज्‍यों के 2/3 प्रतिनिधित्‍व और केंद्र के 1/3 प्रतिनिधित्‍व से निर्मित होगी। जी एस टी कौंसिल द्वारा कर की दरों, विवाद निपटारे, छूट और अन्‍य विषयों पर सभी निर्णय लिये जाएंगे। जी एस टी कौंसिल की अनुशंसा (75% मतों के साथ) केंद्र और राज्‍यों के लिए बाध्‍यकारी होगी।

व्‍यावसायिक प्रक्रिया

पंजीकरण:

वर्तमान डीलरों को इस प्रणाली में स्‍वत:स्‍थानां‍तरित (ऑटो-माइग्रेट) किया जाएगा और उन्‍हें निम्‍नलिखित व्‍यवस्‍था के साथ पैन आधारित 15 अंकों का जीएसटिन प्रदान किया जाएगा।
राज्‍य कोडपैनएंटिटी कोडरिक्‍त स्‍थानचेक अंक
123456789101112131415
एंटिटी कोड राज्‍य के भीतर विविध व्‍यावसायिक चरणों में काम करने वाले करदाताओं पर लागू होगा।

रिटर्न (कर-विवरणी):

नियमित डीलर: मासिक फाइलिंग
  • फॉर्म जी एस टी आर-1: समस्‍त बिक्री बिल को अपलोड करना (10 तारीख तक)
  • फॉर्म जी एस टी आर-2ए: आवक की आपूर्ति की ऑटो पॉपुलेटेड जानकारी प्राप्तकर्ता को (11th को) आपूर्तिकर्ता द्वारा प्रस्तुत फॉर्म जी एस टी आर-1 के आधार पर उपलब्ध किया जायेगा
  • फॉर्म जी एस टी आर -2: अपनी खरीद के तौर पर ऑटो-पॉप्‍युलेटेड काउंटरपार्टी सेल्‍स स्‍वीकार करना और किसी छूटी हुई खरीद को शामिल करना (15 तारीख तक)
  • फॉर्म जी एस टी आर-1ए: फॉर्म जी एस टी आर-2 मै जावक आपूर्ति के रूप में जोड़ा सुधारा या प्राप्तकर्ता द्वारा नष्ट का विवरण आपूर्तिकर्ता 20 तारीख को उपलब्ध किया जाएगा
  • फॉर्म जी एस टी आर -3: ऑटो-पॉप्‍युलेटेड जी एस टीआर -3 को 20 तारीख तक जमा करना
  • फॉर्म जी एस टी आर-9: वार्षिक वापसी– आईटीसी का लाभ, और जीएसटी का भुगतान किया जिसमे स्थानीय, अंतरराज्यीय और आयात / निर्यात भी  मौजूद है, उनका विवरण प्रस्तुत करे (अगले वित्त वर्ष के 31 दिसंबर)
कम्‍पोजीशन डीलर: तिमाही फाइलिंग
  • फॉर्म जी एस टी आर-4ए: आवक आपूर्ति की जानकारी जो प्राप्तकर्ता के लिए उपलब्ध है फॉर्म जी एस टीआर -1 (आपूर्तिकर्ता द्वारा प्रस्तुत(त्रैमासिक)) के आधार पर रचना योजना के तहत पंजीकृत किया जायेगा
  • फॉर्म जी एस टी आर -4: गुड्स एंड सर्विसेस के सभी जावक आपूर्ति सजाएं । इसमें शामिल है फॉर्म फॉर्म जी एस टी आर-4ए द्वारा ऑटो पॉपुलेटेड जानकारी , देय कर और कर के भुगतान (तिमाही के अंत के बाद 18 वीं द्वारा प्रस्तुत)
  • फॉर्म जी एस टी आर-9ए: कर भुगतान के विवरण के साथ दायर की तिमाही रिटर्न की समेकित विवरण प्रस्तुत करे (अगले वित्त वर्ष के 31 दिसं)
जीएसटी रिटर्न के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया इन ब्लॉग पोस्ट लिंक पर जाएँ –
जी एस टी के तहत कौन-कौन से रिटर्न्स होते हैं ?

भुगतान:

  • 10,000 से अधिक राशि के लिए अनिवार्य ई-पेमेंट
  • ऑनलाइन: एनईएफटी/आरटीजीएस/आईएमपीएस
  • ऑफ़लाइन: कैश/चेक/डीडी/एनईएफटी/आरटीजीएस आदि
  • चालान ऑटो-पॉप्‍यूलेटेड होते हैं और इन्‍हें डाउनलोड किया जा सकता है

रिफंड:

रिफंड प्रक्रिया ऑटोमैटिक तरीके से पूरी की जाएगी और जहां भी लागू होगा, बिना जांच किए 80% 90% रिफंड अंतरिम रूप से प्रदान किया जाएगा।

प्रभाव वाले प्रमुख क्षेत्र

व्‍यवसाय के लिए प्रभाव के मुख्‍य क्षेत्र ये होंगे:
  • टेक्‍नोलॉजी को अपनाना अनिवार्य है: क्‍योंकि सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी और रिटर्न फाइल करना बीजाकार प्रकृति (बिल के आधार पर) का होगा इसलिए करदाता को उपयुक्‍त टेक्‍नोलॉजी को अपनाना होगा ताकि दक्षता और कुशलता सुनिश्चित हो। पहले की स्थिति से विपरीत, पेपर फाइलिंग करने का विकल्‍प नहीं होगा।
  • अखिल-भारतीय बाजार तक पहुंच: राज्‍य के भीतर और राज्‍यों के बीच परस्‍पर होने वाले व्‍यापार कर-निरपेक्ष (टैक्‍स न्‍यूट्रल) हो जाएंगे और मूल विक्रेताओं और ग्राहकों दोनों के लिए अनुपालन की परेशानी के बगैर, समग्र भारत एक बाज़ार के तौर पर पर उपलब्‍ध हो जाएगा।
  • नकद प्रवाह की योजना: रिटर्न फाइल करते समय खरीदारी पर इनपुट टैक्‍स क्रेडिट केवल अं‍तरिम रूप से प्रदान किया जाएगा और समान बिक्री के अपलोड किये जाने और आपूर्तिकर्ता द्वारा देयता को मुक्‍त करने के बाद ही इसकी पुष्टि होगी। इस तरह, मिलान न होने की स्थिति में नकद प्रवाह पर असर पड़ेगा। चूंकि कोई भी आपूर्ति कर योग्‍य होगी इसलिए एक शाखा से दूसरी शाखा में हस्‍तांतरण के फलस्‍वरूप भी कर देयता उत्‍पन्‍न होगी जिसके कारण नकदी अवरुद्ध होगी। प्राप्‍त अग्रिम पर भी जी एस टी लागू होगा और रिवर्स शुल्‍क को वस्‍तुओं पर भी विस्‍तारित किया जाएगा। व्‍यवसायों को पुनर्विचार करना होगा कि वे प्रभावी रूप से कैसे व्‍यवसाय करें और सौदों की रूपरेखा कैसे बनाएं।
  • अनुपालन में वृद्धि: एचएसएन कोड के साथ सूचित किये जाने वाले डेटा के बीजाकार स्‍तर (बिल के आधार पर) से अनुपालन बोझ बढ़ने की संभावना है पर अच्‍छी खबर यह है कि इसके लिए पूरी तरह से टेक्‍नोलॉजी का समर्थन मिलता है। अपने रिटर्न अपलोड न करने वाले विक्रेताओं की निगरानी करने के अपने बोझ को सरकार ने इनपुट क्रेडिट में कटौती द्वारा स्‍थानांतरित कर दिया है।
  • ब्रांच / आपूर्ति श्रंखला की री-इंजीनियरिंग: कई राज्‍यों में उपस्थिति वाले व्‍यवसायों को कर संबंधी पहलू को ध्‍यान में रखते हुए अपने गोदाम व शाखा नेटवर्क की योजना दोबारा बनाने और उन्‍हें राज्‍य आधार पर रखने की बजाय बाजारों के निकट स्‍थापित करने की जरूरत पड़ेगी।
  • कीमत निर्धारण संबंधी कार्यनीति: कैस्‍केडिंग इफेक्‍ट (सोपानी प्रभाव) की समाप्ति के कारण, उत्‍पादों की कीमतें नीचे आने की संभावना है। इसलिए अधिप्राप्ति और बिक्री की नई वास्तविकताओं के हिसाब से व्‍यवसायों को अपना तालमेल बनाने की आवश्‍यकता होगी।
  • अनुबंधों पर दोबारा सौदेबाजी: जी एस टी दरों को समाहित करने के लिए कार्य अनुबंधों और अन्‍य कई वर्ष की आपूर्ति के समझौतों पर फिर से सौदेबाजी करनी होगी। क्‍योंकि कर अग्रिम पर देय होंगे इसलिए ऐसी शर्तों पर दोबारा दृष्टि डालने की आवश्‍यकता है।

इसके बाद क्या?

राज्‍यसभा में 122वें संवैधानिक संशोधन बिल को मंजूरी मिलने के बाद, अन्‍य तात्‍कालिक कदम हैं:
  • क्‍योंकि यह एक संवैधानिक संशोधन है इसलिए कम से कम 15 राज्‍य विधानसभाओं द्वारा इस बिल को सत्‍यापित करने की आवश्‍यकता भी है।
  • बिल को राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिलना और मंजूरी मिलने की तिथि से अगले 60 दिनों के भीतर जी एस टी कौंसिल का गठन किया जाना आवश्‍यक है।
  • संसद के शरदकालीन सत्र में सीजी एस टी और आईजी एस टी बिल (संभवत मनी बिल के तौर पर) और 29 राज्‍य विधानसभाओं में एसजी एस टी बिल को पारित किया जाना।
  • जनवरी 2017 से जी एस टी नेटवर्क का कार्य आरंभ करना।
ये काम चुनौतीपूर्ण नजर आते हैं किंतु इन्‍हें प्राप्‍त किया जा सकता है।

हम सभी के लिए आगे का काम

1 अप्रैल 2017 को जी एस टी के आरंभ होने की संभावित ति‍थि के साथ, करदाता को इस दिशा में पूर्वतैयारी वाले कई कदम उठाने होंगे। शुरुआत के लिए एक स्‍वच्‍छ आरंभिक शेष होना इसमें आसानी से जाने में मददगार होगा।
  1. वर्तमान प्रणाली (सेनवैट, वैट) में से इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (रिटर्न/इनपुट/कैपिटल गुड्स में) को जी एस टी (सीजी एस टी, एसजी एस टी) में ले जाया जाएगा। इसलिए लेखा पुस्‍तकों को अद्यतन रखना अनिवार्य होगा। इससे कर निर्धारण (असेसमेंट) के दौरान कंपनियों को सहायता मिलेगी क्‍योंकि केवल उसी समय पर आंकड़े लिये जाएंगे और यदि अनुरूपता/स्‍पष्‍टता नहीं होगी तो व्‍यवसायों को कई प्रकार के वित्तीय व गैर-वित्तीय कठिनाई से गुजरना होगा।
  2. ERP में समस्‍त एकाउंटिंग और पार्टी मास्‍टर्स को वैधानिक रूप से भरे जाने वाले विवरणों को अपडेट रखना होगा ताकि जी एस टी में सहजतापूर्वक हस्‍तांतरण हो सके।
हमेशा की तरह, वैधानिक परिवर्तनों को समझने और इन्‍हें अपनाने में व्‍यवसायों की सहायता करने में टैली अग्रणी रही है। Tally.ERP 9 में अत्‍यंत सरलीकृत समाधान से जी एस टी में त्‍वरित हस्‍तांतरण और वैधानिक आवश्‍यकताओं को आसानी से नियंत्रित करना सुनिश्चित होगा।
यह नोट सार्वजनिक रूप से उपलब्‍ध सूचना से तैयार किया गया है हालांकि जी एस टी की वास्‍तविक दरें और व्‍यावसायिक प्रक्रिया इसके लागू होते समय काफी अलग हो सकती हैं।

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